आज कल समाज मे स्मार्टफोन और फेसबुक के जरिए एक
बिमारी ने दस्तक दी है जो कि युवाओ, बुर्जुगो और बच्चो के दिलो दिमाग पर हावी हो गई
है। कैंडी क्रश एक गेम जिसका जन्म लंदन के किंग संस्थान के द्वारा 14 अप्रैल 2012
मे फेसबुक उपभोग्ताओ के लिए हुआ। नवम्बर 2012 मे इसका मोबाइल एप भी लाँच कर दिया
जिसे गूगल प्ले स्टोर से डाउनलोड किया जा सकता है।
इसमे लाल, संतरी, नीली, पीली और बैंगनी रंग की
अलग अलग आकृति होती है और कम से कम एक जैसी तीन आकृतियो को मिलाना पडता है वो भी
तय समय सीमा के अंदर। बिते वर्ष 2014 मे इस गेम को सबसे ज्यादा लोगो ने डाउनलोड किया
और अपने साथ साथ दोस्तो को भी इसका शिकार बनाया। इसे खेलने के साथ ही इसमे कुछ स्तर के बाद अपने
साथियो को इसे खेलने के लिए आमंत्रित करना पडता है। जिसे एक ललकार के साथ दुसरा
साथी ज्यादा अंक के चक्कर मे दिन-रात बस, मैट्रो, कैफे, घर, आफिस, सब जगह अपने फोन
मे नजऱ गडाये रहता है। जहाँ एक ओर यह मनोरंजन का साधन है वही दूसरी ओर हम कही न कही
सिर्फ और सिर्फ इसी के होकर रह गये है। अब बस, मैट्रो, घर, आफिस, चाय की दुकान आदि
पर कोई सामाजिक चर्चा नही होती परिणाम स्वरूप हमारी तार्किक शक्ति कमजोर हो रही
है।
जिससे बचने के लिए हमे जरूरत है इसे अपने दिमाग
पर हावी न होने दे और सिर्फ थकान मिटाने के लिए ही खेले न कि सिर्फ खेलेने के
चक्कर मे मानसिक रूप से ही थक जाए।