स्कूल लाईफ खत्म अब तो मस्ती के दिन है यारो। जैसे तैसे दिल्ली विश्वविद्यालय में एडमिशन हो ही गया। दिल्ली युनिवर्सिटी के किसी भी कॉलेज में एडमिशन हो गया तो मानो तीन साल की तो मौज है। कॉलेज चाहे कोई भी हो मगर कुछ चीजें सारे कॉलेज एक जैसी होती है। जैसे पहले ही दिन कन्वोकेशन प्रोग्राम जिसमें आधे से ज्यादा टाईम तो यही ढूंढने में लग जायेगा कि ऑडिटोरियम कहां है। ऑडी में यहां आपके आस पास में जो भी बंदे होंगे वो आपके कोर्स के नहीं होंगे। इनमें से एक आपका दोस्त बन जायेगा और बाद में इसके मिलने पर हमेशा यह तुम्हे अपने दोस्तो को बताना पडेगा कि कौन है यह। कॉलेज में कुछ लोग ऐसे भी मिलेंगे जो पहले ही दिन से इस केल्कुलेशन में जुट जायेंगे कि कॉलेज में कितनी लडकिया है और किसे पटाया जाये, क्योकि इनका मानना होता है कि शुरु के दो तीन दिन में अगर कोई पट गयी तो पट गयी वर्ना ठनठन गोपाल। एक जमात ऐसी मिलेगी जो हिन्दी मीडियम वालो को ऐसे हीन नजर से देखेगी कि मानो एलिजाबेथ कि पोते-पोती यही है। यह अकसर कॉलेज के बाहर खोके पर सुट्टे मारते, पब-डिस्क, और दो ब्रांड में कम्पैरिजन करते नजर आयेंगे बेशक खुद कमला नगर औऱ पालिका के कपडे पहनते हो। हर डिपार्टमेंट में एक लडका तो ऐसा होगा ही जो शुरुआती दिनों में गिटार लाता हो। गुलाबी आंखे जो तेरी देखी यह इनका फेवरेट सॉंग होता है। कॉलेज में ऐसे बंदे भी मिलेंगे जो ज्ञान की उल्टियां करते रहते हो। यह दिन के चौब्बीस घंटे में से पच्चीस घंटे पढते है। इन्हें मार्केट में बुक लॉंच होने के कुछ ही घंटो के बाद वो बुक इनके पास होने का खिताब होता है। एक पलटन ऐसी होगी जो सिर्फ कॉलेज के गेट के बाहर और कॉलेज के कैंटीन में ही मिलेगी। इनकी फेवरेट लाईन होती है ‘बेलेट नम्बर .. प्लीज वोट फॉर ...’ शुरुआती दिनो में यह बहुत व्यस्त रहते है। कब कहा धऱना देना है इन्हे बखूबी पता होता है। ढपली, स्लोगन और मंच आदि की व्यवस्था करने में यह माहिर होते है। कुछ ऐसे भी महापुरुष मिलेंगे जिन्हें देख लगेगा कि इन्होने जीवन की सच्चाई को जान लिया है। कौन क्या सोचता है इन्हे इस बात से कोई फर्क नहीं पडता। बडी दाढी, बडे बाल के साथ कुर्ता, जिंस, चप्पल और बगल में थैला नुमा बैग यहीं इनकी पहचान है। एक तरफ लोग मिलेंगे जो कहेंगे ‘यू आर सो लक्की यू आर लिविंग विद यौर फैमिली’ ये बात बात पर खुद को बाहरी बता कर इमोश्नली ब्लैकमेल करेंगे, तो दूसरी तरफ दिल्ली वालो को होस्टल लाईफ अच्छी लगेगी और बार बार बालेंगे जिंदगी के असली मजे तो तुम्हारे है यार। काश मैं भी हॉस्टल में होता.. एक प्रजाति ऐसी मिलेगी जो सिर्फ स्पोंसर्स को ही ढूंढने के लिए कॉलेज में आते है दरअसल में यह किसी न किसी सोसाइटी के हेड होते है। कॉलेज फेस्ट का सारा कारभार इन्ही के जिम्मे होता है।
कॉलेज का मतलब सिर्फ मस्ती ही नही होता है दोस्तो, पर हां यहा मस्ती और पढाई के साथ साथ बहुत कुछ नया सिखने को मिलेगा जो कि फ्यूचर में काम आयेगा ही आयेगा। जो भी करना पूरी शिद्दत के साथ करना। उज्व्वल भविष्य की शुभकामनाएं इस आशा के साथ कि रोज आपका इनमें से कुछ या सारे लोगो से सामना होगा ही। और अगर आपके बडे भाई बहन भी डीयू के ही प्रोडक्ट है तो उन्हे भी ऐसे लोगो से दो चार होना पडा ही होगा।
कॉलेज का मतलब सिर्फ मस्ती ही नही होता है दोस्तो, पर हां यहा मस्ती और पढाई के साथ साथ बहुत कुछ नया सिखने को मिलेगा जो कि फ्यूचर में काम आयेगा ही आयेगा। जो भी करना पूरी शिद्दत के साथ करना। उज्व्वल भविष्य की शुभकामनाएं इस आशा के साथ कि रोज आपका इनमें से कुछ या सारे लोगो से सामना होगा ही। और अगर आपके बडे भाई बहन भी डीयू के ही प्रोडक्ट है तो उन्हे भी ऐसे लोगो से दो चार होना पडा ही होगा।