Saturday, 27 August 2016

दर दर भटकते शनिदेव

  शनि एक ऐसा नाम जिसे सुनने मात्र से एक ऐसी छवी आखों के सामने आती है जिसका शरीर काले रंग का है। आंखें बडी खुली हुई, भौं चढी हुई और क्रोध से भरे हुए है। इनके हाथों में धनुष, बाण, त्रिशूल हैं। यह तस्वीर तो शनि नाम सुनने मात्र से ही जहन में बन जाती है। क्या कोई भगवान इतना भयावह और गुस्से वाला हो सकता है क्या? अभी तक तो कुछ एक को छोड कर, भगवान के सारे चित्र मुर्तियां जो भी देखी सब में वह मंद मुस्कान के साथ ही होते है। पिछले महिने, एक शाम किर्ती नगर मैट्रो से निकलते ही कुछ ऐसा नजारा देखने को मिला कि हंसी रुक नहीं रही थी और साथ ही शनि को जानने की इच्छा बढ गयी। गूगल करने से ज्यादातर यहीं मिला कि शनि की साढे साती क्या है? शनि को कैसे खुश करे? आदि आदि....  इसी बीच एक वेबसाईट भी मिली शनिधामडोटइन, जिसमे कुछ नया पढने को मिला 'शनि शत्रु नहीं मित्र है'। फिर यूट्यूब पर दांती महाराज को भी ढूंढा। कुछ विडीयो मिले पर यह क्या?  यह समझ ही नही आ रहा की, यह समझा रहे है या डांट रहे है। खैर यह भी कर्म क्रिया की ही बात कर रहे थे। इतनी काली दाल की पोटली, तो किसी को अभिषेक और मंत्र जाप वगैरह वगैरह। फिर शनि चालीसा को अर्थ सहित पढा तो ज्यादातर में नकारात्मक छवि ही दिखी बस शुरुआती कुछ लाईन में कहा गया कि हे प्रभु आप जिस पर प्रसन्न हो जाते हो, तो दरिद्र को भी एक क्षण में राजा बना देते हैं। लेकिन इस के बाद कई ऐसे प्रसंग बताए जिसमें सिर्फ शनि की वजह से ही काम खराब हुये हो। जैसे आपने कैकेयी द्वारा श्रीराम को वन में भेज दिया, बाद में सीता अपहरण करवा दिया। आगे राजा विक्रमादित्य को आपने ही तेली के घर में कोल्हू चलाने के लिए मजबूर करवा दिया। राजा हरिशचंद्र, कौरवों पर आपकी दृश्टि आदि आदि अनेक प्रसंग है कि किस प्रकार आप नाश के कारक बने। कुल मिला कर शनि कि ऐसी छवी निकल कर सामने आती है कि जिस पर शनि की दृश्टि पडी वो तबाह हो गया। अब ऊपाय यह है कि पंडित द्वारा जप-तप, पूजा-पाठ करा कर शनि का प्रकोप कम करवा सकते हो। फिर याद आया कि सोसाइटी में घर-घऱ मांगने वाले बाबा या भिखारी को कई लोग मना कर देते थे लेकिन शनिवार को एक छोटी बाल्टी में लोहे कि टीन के सांकेतिक शनि महाराज बने रहते है और हर घर से उसे तेल या पैसे मिलते ही है। लेकिन आज कल लगता है धर्म के नाम पर बिजनेस करने वालो को यह बात बखूबी समझ आ गयी है कि आज के भाग-दौड भरी जिंदगी में कई लोग ऐसे भी है जो चाह कर भी समय के अभाव के कारण मंदिर नहीं आ पाते। और उनकी जेब से पैसे निकलवाने के लिए इन ठेकेदारो ने भगवानो को ही भक्तो के पास दर दर भटकते पहुंचा दिया। तभी तो आज एक बक्से के साथ लोहे के टिन की शनि की प्रतिमा जिसमें एक सिर और ऊपर की ओर दो हाथ, सामने एक दिया और एक माला के साथ हर रेड लाईट, मैट्रो स्टेशन के बाहर, चौकचौराहे, फुटपाथ और शौचालय के बगल में भी शनिदेव मौजूद रहते है। 
अपनी कांख में शनिदेेव को दबाये बच्चा
पिछले माह किर्ती नगर मैट्रो के बाहर देखा के 4-5 बच्चे इस शनिदेव का बक्सा खोल तेल और पैसे अलग कर, साइड में थैला डाल, एक ने उस शनि की प्रतिमा अपने बगल में दबा कर, बक्सा सिर पर उठा कर चल दिये। मैं यह देखकर खूब हंस रहा था कि जिस शनि से सबको इतना डराया गया और लोग डर भी रहे है उसी शनि को यह बच्चे अपनी कांख में दबाकर बिना किसी फिक्र के चले जा रहे है।
बक्सा उठा कर ले जाते बच्चे
इन बच्चो का मै शुक्रगुजार हूं कि इन के कारण मैने शनि के बारे में पढा। और एक बात दोस्तो शनि के बारे पढते हुए एक बात और सामने आयी कि हिन्दू धर्म गुरुओ में इस बात का भी विवाद है कि शनि ग्रह है या भगवान ?




Thursday, 18 August 2016

आपकी साथी भी किसी कि बहन है, उसी तरह जिस तरह आपकी बहन किसी कि साथी है।




             आज रक्षाबंधन का त्यौहार है। हम सभी बचपन से इसे मनाते आ रहे है। इसके बारे में पढते आ रहे है। खासकर पेपर के समय में तो जरुर ही रट्टे मारते थे कि रक्षाबंधन हिंदुओ का पवित्र त्योहार है यह सावन मास कि पूर्णिमा को मनाया जाता है। इस दिन भाई बहन सुबह सुबह सुबह नहा धोकर नये कपडे पहन कर तैयार होते है आदि आदि करीब एक दो पेज तो हम सबने रटा ही होगा। लेकिन क्या हम इसका महत्व सच में समझते है। अगर हां तो क्यो हम अपनी बहन और पडोस में रहने वाली, सहपाठी, सहकर्मी में अंतर कर देते है। खैंर अंतर करना भी ठीक है लेकिन इतना बढा अंतर कहा तक ठीक है साहब। खुद तो छुट्टी के दिन घुमने के लिए आप अपनी साथी को बुलाते है और हरसंभव प्रयास करते है कि वह आये लेकिन घर में बहन बोले कि आज दोस्तों के साथ बाहर घुमने जाना है तो लग जाते है  सवालों की झडी लगाने। अपनी बहन की सुरक्षा की चिंता करना कि कही उसके साथ कुछ गल्त न हो जाये? कैसे दोस्त होंगे?  जमाना बहुत खराब है । इस जमाने को खराब किसने किया है । जाहिर है आपने और मैने, जिसे हम कभी कभी असमाजिक तत्व भी कह देते है। राजनेता हमेशा भाईयो बहनो कर के संबोधित करते है लेकिन क्या सच में वह सबको वही दर्जा देता है जो अपनी बहन को देता है। अगर हां तो क्यों मां बहन कि गालियां इनके मुंह पर ही रहती है। क्यों कभी कभी यह किसी महिला के साथ अभद्र व्यवहार कर देते है जो शायद अपनी  बहन के बारे में गल्ती से भी कल्पना नहीं कर सकते। पुलिस जो हमारी रक्षा के लिए मुस्तैद रहती है आज के दिन कई संगठनों की महिलाएं उन्हें राखी बांधती है और नारीयों की रक्षा का वचन लेती है तो क्यों बलात्कार, अपहरण जैसी घटनाओं के बाद भी कुछ पुलिस वाले एफआईआर करने से कतराते है। या अजिबो गरिब सवाल पूछ कर पीडिता को असहज करते है। हमने प्राचीन काल के अनुसार गुरुओ, ब्राह्मणो द्वारा रक्षा सूत्र बंधवाने का प्रसंग भी सुना है। तो आज ये ही कुछ तथाकथित बाबा क्यों अपनी बहन बेटियो की उम्र की लडकियों के साथ भोग विलास में लिप्त है। आखिर परेशानी कहा है? क्यो समाज में महिलाओ के साथ बलात्कार, अपहरण, शोषण आदि इतना बढ रहा है?  मेरी समझ में शायद हम अपने और पराये में अंतर कर देते है। अगर हम अपनी महिला साथियों के साथ ऐसा कुछ दुर्व्यवहार करें ही नहीं जिसे अपनी बहन के साथ होता न देख सकें। और जिस प्यार स्नेह कि अपेक्षा हम अपनी महिला साथीयों से करते है, वहीं हक अपनी बहन को भी उसके साथीयों के लिए दें तो समस्या कि जड ही खत्म क्योकि आपकी साथी भी किसी कि बहन है उसी तरह, जिस तरह आपकी  बहन किसी कि साथी है। एक समारोह में दामिनी की मां ने बहुतखूब कहा कि कभी किसी भी लडकी के साथ कुछ भी करने से पहले यह सोचना कि अगर यह तुम्हारी बहन के साथ होता तो तुम क्या करते। यकिनन यह ऐसी लाईन है जिसे अगर हम गांठ मार ले तो शायद बलात्कार, अपहरण, शोषण जैसी घटनाएं बिल्कुल बंद हो जाए। तो आइए आज रक्षाबंधन के दिन अपनी बहन कि रक्षा के साथ साथ सभी महिलाओ की रक्षा करे, उनका सम्मन करें। उन्हे पढाये लिखाये आगे बढायें।