शनि एक
ऐसा नाम जिसे सुनने मात्र से एक ऐसी छवी आखों के सामने आती है जिसका शरीर काले रंग
का है। आंखें बडी खुली हुई, भौं चढी
हुई और क्रोध से भरे हुए है। इनके हाथों में
धनुष, बाण, त्रिशूल हैं। यह तस्वीर तो शनि नाम
सुनने मात्र से ही जहन में बन जाती है। क्या कोई भगवान इतना भयावह और गुस्से वाला
हो सकता है क्या? अभी तक तो
कुछ एक को छोड कर, भगवान के
सारे चित्र मुर्तियां जो भी देखी सब में वह मंद मुस्कान के साथ ही होते है। पिछले महिने,
एक शाम किर्ती नगर मैट्रो से निकलते ही कुछ ऐसा नजारा देखने को मिला कि हंसी रुक
नहीं रही थी और साथ ही शनि को जानने की इच्छा बढ गयी। गूगल करने से ज्यादातर यहीं
मिला कि शनि की साढे साती क्या है? शनि को कैसे खुश करे? आदि आदि.... इसी बीच एक वेबसाईट भी
मिली शनिधामडोटइन, जिसमे कुछ
नया पढने को मिला 'शनि शत्रु
नहीं मित्र है'। फिर
यूट्यूब पर दांती महाराज को भी ढूंढा। कुछ विडीयो मिले पर यह क्या? यह समझ ही नही आ रहा की, यह समझा रहे है या डांट रहे है। खैर यह
भी कर्म क्रिया की ही बात कर रहे थे। इतनी काली दाल की पोटली, तो किसी को अभिषेक और मंत्र जाप वगैरह
वगैरह। फिर शनि चालीसा को अर्थ सहित पढा तो ज्यादातर में नकारात्मक छवि ही दिखी बस
शुरुआती कुछ लाईन में कहा गया कि हे प्रभु आप जिस पर प्रसन्न हो जाते हो, तो दरिद्र को भी एक क्षण में राजा बना देते हैं। लेकिन इस के बाद कई ऐसे
प्रसंग बताए जिसमें सिर्फ शनि की वजह से ही काम खराब हुये हो। जैसे आपने कैकेयी द्वारा श्रीराम को वन में
भेज दिया, बाद में सीता
अपहरण करवा दिया। आगे राजा विक्रमादित्य को आपने ही तेली के घर में कोल्हू चलाने
के लिए मजबूर करवा दिया। राजा
हरिशचंद्र, कौरवों पर आपकी दृश्टि आदि आदि अनेक प्रसंग है कि किस प्रकार आप नाश के
कारक बने। कुल मिला कर शनि कि ऐसी छवी निकल कर सामने आती है कि जिस पर शनि की
दृश्टि पडी वो तबाह हो गया। अब ऊपाय यह है कि पंडित द्वारा जप-तप, पूजा-पाठ करा कर
शनि का प्रकोप कम करवा सकते हो। फिर याद आया कि सोसाइटी में घर-घऱ मांगने वाले
बाबा या भिखारी को कई लोग मना कर देते थे लेकिन शनिवार को एक छोटी बाल्टी में लोहे
कि टीन के सांकेतिक शनि महाराज बने रहते है और हर घर से उसे तेल या पैसे मिलते ही
है। लेकिन आज कल लगता है धर्म के नाम पर बिजनेस करने वालो को यह बात बखूबी समझ आ
गयी है कि आज के भाग-दौड भरी जिंदगी में कई लोग ऐसे भी है जो चाह कर भी समय के
अभाव के कारण मंदिर नहीं आ पाते। और उनकी जेब से पैसे निकलवाने के लिए इन ठेकेदारो
ने भगवानो को ही भक्तो के पास दर दर भटकते पहुंचा दिया। तभी तो आज एक बक्से के साथ
लोहे के टिन की शनि की प्रतिमा जिसमें एक सिर और ऊपर की ओर दो हाथ, सामने एक दिया
और एक माला के साथ हर रेड लाईट, मैट्रो स्टेशन के बाहर, चौकचौराहे, फुटपाथ और
शौचालय के बगल में भी शनिदेव मौजूद रहते है।
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| अपनी कांख में शनिदेेव को दबाये बच्चा |
पिछले माह किर्ती नगर मैट्रो के बाहर
देखा के 4-5 बच्चे इस शनिदेव का बक्सा खोल तेल और पैसे अलग कर, साइड में थैला डाल,
एक ने उस शनि की प्रतिमा अपने बगल में दबा कर, बक्सा सिर पर उठा कर चल दिये। मैं
यह देखकर खूब हंस रहा था कि जिस शनि से सबको इतना डराया गया और लोग डर भी रहे है
उसी शनि को यह बच्चे अपनी कांख में दबाकर बिना किसी फिक्र के चले जा रहे है।
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| बक्सा उठा कर ले जाते बच्चे |
इन
बच्चो का मै शुक्रगुजार हूं कि इन के कारण मैने शनि के बारे में पढा। और एक बात
दोस्तो शनि के बारे पढते हुए एक बात और सामने आयी कि हिन्दू धर्म गुरुओ में इस
बात का भी विवाद है कि शनि ग्रह है या भगवान ?

