देखते ही देखते साल 2015 भी जाने वाला है। हर साल की तरह यह साल भी कुछ खट्टी मिठी यादें देकर जा रहा है। राजनीति दृष्टिकोण से भी 2015 कई मायनो में यादगार रहने वाला है। साल की शुरुआत में ही योजना आयोग का नाम बदलकर नीति आयोग कर दिया। वहीं दिल्ली में विधानसभा चुनाव में अरविंद केजरीवाल की अगुवाई में आम आदमी पार्टी ने 70 सीटों में से 67 सीटों पर कब्जाकर नया कीर्तिमान रच डाला है और बीजेपी को महज 3 सीटों पर ही संतोष करने के लिए मजबूर कर दिया। तो साल के अंत में हुए बिहार विधानसभा चुनाव भी हमेशा के लिए यादगार बन गया। विकास के मुद्दे पर शुरु हुआ चुनाव प्रचार सारी हदें पार करता हुआ शैतान और ब्रह्मपिशाच तक जा पहुंचा। मोदी द्वारा सवा लाख करोड रुपये के पैकेज के ऐलान पर आरएसएस प्रमुख के आरक्षण की समीक्षा वाला बयान भारी पडा। दादरी में अखलाक की हत्या, बीफकार्ड और दाल 200 रुपये के पार जाने से बिहार चुनाव के ऐसे नतीजे आये जिसकी किसी को भी उम्मीद नहीं थी। राजनीतिक पंडित भी असमंजस में दिखे। समूचा मंत्रीमंडल द्वारा भाजपा के लिए प्रचार करने के वाबजूद भाजपा को बिहार में भी हार का सामना करना पडा तो वही आरजेडी ने सबसे ज्यादा सीट जीत कर सबको चौका दिया। विपक्ष ने हर छोटे बडे मुद्दे पर सरकार को घेरा चाहे एफटीआइआइ में गजेंद्र चौहान की न्युक्ति का मामला हो या फिर शिक्षा के निजीकरण की बात, दादरी में अखलाक की हत्या, तो व्यापम घोटाले से जुडे गवाहों और लोगो की एक के बाद एक संदिग्ध रुप से मौत ने सरकार को ही कटघरे में खडा कर दिया। कलबुर्गी की हत्या के बाद तो मानो सम्मान वापसी की बाढ ही आ गयी। मानसून सत्र और शीतकालीन सत्र भूमिअधिग्रहण, बीफ,जीएसटी और नेश्नल हेराल्ड जैसे मुद्दे पर विपक्ष के हंगामे के चलते टप रहा।बस आरोप प्रत्यारोप का दौर चलता रहा। बरहाल 2015 प्रधानमंत्री मोदी के विदेश दौरे के कारण भी याद किया जायेगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मार्च में सेशेल्स और मॉरिशस होते हुए वे श्रीलंका पहुंचे और मार्च के अंत में वे सिंगापुर भी गए तो अप्रैल में मोदी ने सबसे पहले फ्रांस में राफाल लड़ाकू विमानों का सौदा तय किया। फ्रेंच स्पेस एजेंसी में उन्होंने भारतीय छात्रों से मिले इसके बाद वे जर्मनी पहुंचे जहां उन्होंने चांसलर अंगेला मैर्केल के साथ हनोवर मेले का उद्घाटन किया। राजधानी बर्लिन में उन्होंने जर्मनी में रह रहे भारतीयों को संबोधित किया और यहां से वे कनाडा गए। मई में मोदी चीन के बाद वे मंगोलिया और फिर दक्षिण कोरिया पहुंचे। दक्षिण कोरिया के साथ उन्होंने सात समझौतों पर हस्ताक्षर किए। जून की शुरुआत में मोदी बांग्लादेश पहुंचे। प्रधानमंत्री शेख हसीना के अलावा वे राष्ट्रपति अब्दुल हामिद से भी मिले। इस दौरान मोदी की शेख हसीना पर महिला होने "के बावजूद" सफल होने की टिप्पणी आलोचनाओं में घिरी रही। जुलाई में वे रूस और पांच अन्य एशियाई देशों का दौरे पर गए। इनमें कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, तुर्कमेनिस्तान, ताजिकिस्तान और उज्बेकिस्तान शामिल हैं। मोदी ने रूस में सातवें ब्रिक्स सम्मलेन में भाग लिया। अगस्त के मध्य में प्रधानमंत्री ने संयुक्त अरब अमीरात का दो दिवसीय दौरा किया। यात्रा के पहले दिन वे शेख जायद मस्जिद गए जो कि दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी मस्जिद है। सितंबर में संयुक्त राष्ट्र के दौरे पर प्रधानमंत्री मोदी ने जी-4 शिखर सम्मेलन में हिस्सा लिया। ब्रिटेन दौरे पर प्रधानमंत्री ने महारानी एलिजाबेथ और शाही परिवार के साथ भोजन किया, प्रधानमंत्री डेविड कैमरन के साथ बातचीत की और बेंबली स्टेडियम में भारतीय मूल के हजारों लोगों को संबोधित किया। तुर्की के अंताल्या में मोदी ने जी-20 देशों के शिखर सम्मेलन में हिस्सा लिया। इस सम्मेलन को मुख्यतः पर्यावरण सम्मेलन होना था लेकिन पेरिस पर आतंकी हमले के बाद मुख्य ध्यान आतंकवाद और आईएस से लड़ने पर रहा। दिसंबर में नरेंद्र मोदी ने वार्षिक भारत-रूस सम्मेलन में भाग लेने के लिए 24-25 दिसंबर को रूस की यात्रा की।तो अफगानिस्तान में भारत द्वाना निर्मित नए संसद भवन का उद्घाटन किया और काबुल से लौटते वक्त लाहौर में रुकने का अचानक फैसले ने सबको चौका दिया। प्रधानमंत्री मोदी इन देशो को भारत में निवेश के लिए कितना रिझा पाए और मेक इन इंडिया कितना कारगर हुआ यह तो समय ही बताएगा लेकिन सूट बूट की सरकार और फ्लाइट मोड की सरकार जैसे तंज काफी चर्चे में रहे। साल के अंत में भी माहौल काफी हंगामेदार ही रहा डीडीसीए में चल रहे भ्रष्टाचार के खुलासे से आरोप प्रत्यारोप का दौर जारी है। उम्मीद करते है कि आने वाले साल में केंद्र-राज्य और सरकार-विपक्ष का आरोप प्रत्यारोप का दौर खत्म हो। देश की उन्नति के लिए, जनहित के लिए काम हो।
Friday, 1 January 2016
साल 2015
देखते ही देखते साल 2015 भी जाने वाला है। हर साल की तरह यह साल भी कुछ खट्टी मिठी यादें देकर जा रहा है। राजनीति दृष्टिकोण से भी 2015 कई मायनो में यादगार रहने वाला है। साल की शुरुआत में ही योजना आयोग का नाम बदलकर नीति आयोग कर दिया। वहीं दिल्ली में विधानसभा चुनाव में अरविंद केजरीवाल की अगुवाई में आम आदमी पार्टी ने 70 सीटों में से 67 सीटों पर कब्जाकर नया कीर्तिमान रच डाला है और बीजेपी को महज 3 सीटों पर ही संतोष करने के लिए मजबूर कर दिया। तो साल के अंत में हुए बिहार विधानसभा चुनाव भी हमेशा के लिए यादगार बन गया। विकास के मुद्दे पर शुरु हुआ चुनाव प्रचार सारी हदें पार करता हुआ शैतान और ब्रह्मपिशाच तक जा पहुंचा। मोदी द्वारा सवा लाख करोड रुपये के पैकेज के ऐलान पर आरएसएस प्रमुख के आरक्षण की समीक्षा वाला बयान भारी पडा। दादरी में अखलाक की हत्या, बीफकार्ड और दाल 200 रुपये के पार जाने से बिहार चुनाव के ऐसे नतीजे आये जिसकी किसी को भी उम्मीद नहीं थी। राजनीतिक पंडित भी असमंजस में दिखे। समूचा मंत्रीमंडल द्वारा भाजपा के लिए प्रचार करने के वाबजूद भाजपा को बिहार में भी हार का सामना करना पडा तो वही आरजेडी ने सबसे ज्यादा सीट जीत कर सबको चौका दिया। विपक्ष ने हर छोटे बडे मुद्दे पर सरकार को घेरा चाहे एफटीआइआइ में गजेंद्र चौहान की न्युक्ति का मामला हो या फिर शिक्षा के निजीकरण की बात, दादरी में अखलाक की हत्या, तो व्यापम घोटाले से जुडे गवाहों और लोगो की एक के बाद एक संदिग्ध रुप से मौत ने सरकार को ही कटघरे में खडा कर दिया। कलबुर्गी की हत्या के बाद तो मानो सम्मान वापसी की बाढ ही आ गयी। मानसून सत्र और शीतकालीन सत्र भूमिअधिग्रहण, बीफ,जीएसटी और नेश्नल हेराल्ड जैसे मुद्दे पर विपक्ष के हंगामे के चलते टप रहा।बस आरोप प्रत्यारोप का दौर चलता रहा। बरहाल 2015 प्रधानमंत्री मोदी के विदेश दौरे के कारण भी याद किया जायेगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मार्च में सेशेल्स और मॉरिशस होते हुए वे श्रीलंका पहुंचे और मार्च के अंत में वे सिंगापुर भी गए तो अप्रैल में मोदी ने सबसे पहले फ्रांस में राफाल लड़ाकू विमानों का सौदा तय किया। फ्रेंच स्पेस एजेंसी में उन्होंने भारतीय छात्रों से मिले इसके बाद वे जर्मनी पहुंचे जहां उन्होंने चांसलर अंगेला मैर्केल के साथ हनोवर मेले का उद्घाटन किया। राजधानी बर्लिन में उन्होंने जर्मनी में रह रहे भारतीयों को संबोधित किया और यहां से वे कनाडा गए। मई में मोदी चीन के बाद वे मंगोलिया और फिर दक्षिण कोरिया पहुंचे। दक्षिण कोरिया के साथ उन्होंने सात समझौतों पर हस्ताक्षर किए। जून की शुरुआत में मोदी बांग्लादेश पहुंचे। प्रधानमंत्री शेख हसीना के अलावा वे राष्ट्रपति अब्दुल हामिद से भी मिले। इस दौरान मोदी की शेख हसीना पर महिला होने "के बावजूद" सफल होने की टिप्पणी आलोचनाओं में घिरी रही। जुलाई में वे रूस और पांच अन्य एशियाई देशों का दौरे पर गए। इनमें कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, तुर्कमेनिस्तान, ताजिकिस्तान और उज्बेकिस्तान शामिल हैं। मोदी ने रूस में सातवें ब्रिक्स सम्मलेन में भाग लिया। अगस्त के मध्य में प्रधानमंत्री ने संयुक्त अरब अमीरात का दो दिवसीय दौरा किया। यात्रा के पहले दिन वे शेख जायद मस्जिद गए जो कि दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी मस्जिद है। सितंबर में संयुक्त राष्ट्र के दौरे पर प्रधानमंत्री मोदी ने जी-4 शिखर सम्मेलन में हिस्सा लिया। ब्रिटेन दौरे पर प्रधानमंत्री ने महारानी एलिजाबेथ और शाही परिवार के साथ भोजन किया, प्रधानमंत्री डेविड कैमरन के साथ बातचीत की और बेंबली स्टेडियम में भारतीय मूल के हजारों लोगों को संबोधित किया। तुर्की के अंताल्या में मोदी ने जी-20 देशों के शिखर सम्मेलन में हिस्सा लिया। इस सम्मेलन को मुख्यतः पर्यावरण सम्मेलन होना था लेकिन पेरिस पर आतंकी हमले के बाद मुख्य ध्यान आतंकवाद और आईएस से लड़ने पर रहा। दिसंबर में नरेंद्र मोदी ने वार्षिक भारत-रूस सम्मेलन में भाग लेने के लिए 24-25 दिसंबर को रूस की यात्रा की।तो अफगानिस्तान में भारत द्वाना निर्मित नए संसद भवन का उद्घाटन किया और काबुल से लौटते वक्त लाहौर में रुकने का अचानक फैसले ने सबको चौका दिया। प्रधानमंत्री मोदी इन देशो को भारत में निवेश के लिए कितना रिझा पाए और मेक इन इंडिया कितना कारगर हुआ यह तो समय ही बताएगा लेकिन सूट बूट की सरकार और फ्लाइट मोड की सरकार जैसे तंज काफी चर्चे में रहे। साल के अंत में भी माहौल काफी हंगामेदार ही रहा डीडीसीए में चल रहे भ्रष्टाचार के खुलासे से आरोप प्रत्यारोप का दौर जारी है। उम्मीद करते है कि आने वाले साल में केंद्र-राज्य और सरकार-विपक्ष का आरोप प्रत्यारोप का दौर खत्म हो। देश की उन्नति के लिए, जनहित के लिए काम हो।
Subscribe to:
Posts (Atom)