Saturday, 3 August 2019

क्रश, प्यार और धोखा


हे ड्यूड आय एम इन रिलेशनशिप विद..., यार आय एम डिप्रेस्ड, मेरा ब्रेकअप हो गया, ही शी चीटिड विद मी... मैंने उसे इतना चाहा था... बट वो ये डिजर्व ही नहीं करता था/ करती थी... ब्लाह... ब्लाह... ऐसा अकसर आपने अपने दोस्तों के मुंह से सुना होगा... ये भी संभव है कि आपने भी कभी न कभी अपने दोस्त को ये बात बोली हो... मैंने अपने बहुत दोस्तों को रिलेशनशिप में जाते हुए और कुछ समय बाद ब्रेकअप कर रोते-धोते देखा... हर किसी का किस्सा सुन के ऐसा लगता है जैसे पहले वाले दोस्त का किस्सा रेप्ले कर दिया है... और सबसे मजेदार बात ये होती है कि मेरे किसी दोस्त की (उसकी अपनी नज़र में) गल्ती नहीं होती है... गल्ती हमेशा उसके पार्टनर में होती है...

ब्रेकअप की कहानियों को सुन सुन कर कई सवाल मेरे मन में उठते रहे... उनमें पहला सवाल ये था कि ये प्यार क्या होता है... आज कल हाई स्कूल में आते ही बच्चे ये मेरी गर्लफ्रेंड वो मेरा ब्वायफ्रेंड बोलते क्यों पाये जाते है... कॉलेज में आते आते रिलेशनशिप में क्यों आ जाते है?  अगर कोई इस प्यार रिलेशनशिप में नहीं है तो क्यों वो दूसरे में वो प्यार ढूंढते है... और कोई भी रिलेशनशिप कुछ समय बाद क्यों खत्म हो जाता है... क्यों जिसके साथ इतना समय बिताया, कभी वो ही सबसे प्यारा सच्चा लगता था/लगती थी, अब क्यों वो ही संसार का सबसे बुरा पार्टनर बन जाता/ जाती है....
इन कहानियों में इस प्यार और ब्रेकअप तक के चक्र की शुरुआत होती है क्रश से... माने आपने किसी को देखा और सामने वाला आपको बेहद पसंद आया/आयी... मन ही मन आप अपने साथ उसको देखने की कोशिश करते है... साथ ही यह भी देखते है कि सामने वाले से बात करने पर वह आपसे उसी तरह से पेश आयेगा या नहीं... और जब काफी हद तक आपका जवाब हां में आता है तब आप शुरुआत करते है सामने वाले से बात करने की... दरअसल यहीं पर प्यार का अंकुर फूट चुका होता है... अब अगर सही से इस अंकुर को खाद पानी धूप मिलती रही तो यह पनप पर हरा भरा वृक्ष बन जाएगा और कहीं आधी तुफान आया तो यह अंकुर जिस स्थिती में जब तक सहनशील होगा सहन करता जाएगा अन्यथा कहीं गिर कर दब कर मर जाएगा... अब बारी आती है प्यार के इजहार करने की ताकि आप सामने वाले को बता सके की आप उससे कितनी मोहब्बत करते है... और यहीं अंकुर से जन्मे पौधे पर खाद की जगह तरह तरह के कीटनाशक का प्रयोग करते है... खुद को परफेक्ट दिखाना, सामने वाले की उम्मीदो को पूरा करना.. उसे खुश रखना... कम्प्रोमाइज करना और सामने वाले से भी इन सभी चीजों की उम्मीद करना जैसे अनेक पेस्टीसाइड्स का इस्तेमान करते है... नतीजनन ये पौधा शुरु-शुरु में तो बड़ी तेजी से बढता है लेकिन सही से खाद पानी ना पाने के कारण जल्दी ही मिट्टी में मिल जाता है...

दरअसल शुरुआती दौर रिलेशनशिप बनाने के चक्कर में हम खुद को सामने वाले की सुविधा अनुसार खुद को ढालने की कोशिश करते है... आप और सामने वाले कम्प्रोमाइज करने को तैयार रहते है... जिससे सामने वाले को हम उसी की तरह लगते है, और वो आप में खुद को देख, सामने वाला आपके साथ एक रिलेशनशिप के लिए तैयार हो जाता है... यही कम्प्रोमाइज करना एक बड़ी समस्या को जन्म देता है जो है एक्सपेक्टेशन... और यही एक्सपेक्टेशन इस रिश्ते को अंदर से खोखला करता जाता है जिससे हम अंजान रहते है... और देखते ही देखते इस रिश्ते को खत्म कर देते है... सही मायने में प्यार तो ज़ीरो एक्सपेक्टेशन के सिद्धांत पर काम करता है अगर आपको सामने वाले से ज़ीरो एक्सपेक्टेशन है, फिर तो वो जो भी आपके लिए करता है, वो आपके लिए सरप्राइज है... और कहते है ना छोटी छोटी सरप्राइज से खुशियां बढती है... और खुशियों से प्यार... वहीं इसके उलट अगर आप सामने वाले से कुछ सरप्राइज की इच्छा रखते है और वो पूरी ना हो तो आप बुरा मानते है... गुस्सा करते है... कम्प्रोमाइज करते है जो कि बाद में ज्वालामुखी की तरह फट जाता है और इस रिश्ते को तबाह कर देता है...

हम में से अधिकतर लोग रिलेशनशिप को स्टेटस सिंबल के रूप में देखते है... स्कूल, कॉलेज और ऑफिस में यार-दोस्तों के मज़ाक के पात्र ना बनने के कारण भी प्यार को ढूंढते रहते है... और जो हमें पसंद हो उसे पाने की कोशिश करते रहते है.. और उसे पाने के चक्कर आजकल समाज में लोग कौन कौन से अपराधिक कदम उठा लेते है ये बात तो आप बखूबी जानते है... जबकि प्यार तो एक एहसास है... इस एहसास को पूरा करने के लिए आपको सामने वाले को जबरन पाने की जरुरत नहीं है... आपको इस बात से कतई फर्क नहीं पड़ना चाहिए कि वो आपको प्यार करता है या नहीं... क्योंकि आप जितना सामने वाले को जबरन अपने करीब लाने की कोशिश करोगे वो उतना ही आप से दूर जाता जाएगा... इसलिए जिससे आप प्यार करते हो उसे खुला छोड़ दो... उसे जहां जाना है जाने दो... जिससे मिलना है दो... अगर उसे भी आपसे प्यार है तो वो आपके पास आयेगा ही आयेगा...

यहां समझने वाली एक बात ये भी है कि अगर सामने वाले का किसी से बात करने से, किसी और से हंसी मजाक करने से यदि आपके जहन में उसके लिए कहीं ना कहीं खोने का डर दिखाता है तो दोस्त यह प्यार नहीं आपकी जरुरत मात्र है जिसे आप प्यार समझ रहे है... ये जरूरत भावनात्मक, मानसिक और शारीरिक किसी भी तरह की हो सकती है... जिसे हम अपने दोस्तों-सहेलियों में मैं इससे प्यार करता हूं/ करती हूं की रट लगाये रहते है... अगर आप भी इसी को प्यार समझते है और इस प्यार को पाने की तालाश में है तो आज से ही अपने सगे संबंधियों के साथ बात करना शुरु करिये... उनके साथ समय व्यतीत करिये और फिर अंतर देखिये...