पिछले कुछ दिन
पहले बनारस घुम कर आया तब से कुछ दोस्तो ने पुछा कि कैसा है बनारस??? तो सोचा इस पर कुछ
लिखकर ही बता दूं। लिखना चाहा तो समझ ही नहीं आ रहा कि क्या लिखूं कहां से शुरु करु, क्योकि बनारस को
तो बनारस जा कर ही देखा जा सकता है, सुना जा सकता है, समझा जा सकता और जिया जा सकता
है। टीवी और समाचारों में बनारस सिर्फ मंदिरों और घाटो तक ही सिमटा है और मुझ जैसे
के लिए तो बनारस का मतलब ही मंदिर,घाट, साडी और पान था। लेकिन बनारस जाकर बहुत कुछ
देखा और समझा। बनारस का मतलब धर्म, संस्कार, आस्था, इतिहास तो है ही, लेकिन पूर्व की ओर जाती पतली गलियां, सिर्फ पतली ही नहीं कब कहां मुड रही है पता ही
नहीं यह गलियां है बनारस। कई जगह तो एक साथ दो बाईक भी नहीं जा सकते फिर भी बिना किसी झुंझलहट और किच
किच के सिर्फ आंखो ही आंखो से समझाना और समझ कर बाईक निकालने की कला है बनारस। हर
अच्छे काम पर हर हर महादेव का जयकारा लगाना है बनारस और जयकारा भी ऐसा जो कि एक
असली बनारसी ही लगा सकता है।
होहोहोहोहोहोर्रर्रर्रर्रर्रर्रर्रर्रर्रर्रर्रर्रर्रर्रर्रहोहोहोहोहोहोर्रर्रर्रर्रर्रर्रर्रर्रर्रहोहोहोहोहोहोर्रर्रर्रर्रर्रर्रर्रर्रर्रमहाआआआआदेएएएएएबब्।
अब चाहे काशी विश्वनाथ मंदिर हो या संकट मोचन मंदिर या किसी शादी में वरमाला हर हर महादेव के जयकारा का अलग ही आनंद है बनारस। वरुणा और असी दो नदियों के बीच
बसा शहर है बनारस और बनारस में एक कोने से दूसरे कोने में जाने पर इनके पुल को पार करना ही
पडेगा। अस्सी घाट में प्रात:काल की आरती के साथ सुबह-ए-बनारस
सूर्योदय का एक एक क्षण आंखों में बस जाना है बनारस। अस्सी और राजघाट के बीच के
घाटों में दशाश्र्वमेध में संध्या की आरती, तो मणिकर्णिका घाट पर अघोरी, डोम और रात दिन
जलती लाश है बनारस। घाटो पर नाविक, फूल बेचने वाले और पंडा की पहचान है बनारस।
बनारस को यू ही मंदिरो का शहर नहीं कहा जाता पूरे बनारस में हर चौक चौराहे पर हर
तीसरे मकान छोड मंदिर दिख जायेंगे। सुंदरकांड पाठ, राम धुनी, हर हर महादेव का जय
घोष है बनारस। चाय और पान की दुकानों पर सामाजिक मुद्दे सुलझाते, बहस करते, सलाह
देते लोगों की पहचान है बनारस। हमउम्र लोगों की बातचीत में बात बात पर गरियाना
(जिसे ये गाली नहीं समझते) है बनारस। कुल्हड (मिट्टी के बरतन) में चाय हो या लस्सी
का स्वाद है बनारस। यहां कोई खाली नहीं मिलता, कुछ न कुछ करता ही रहता है, वो भी
दुसरो के लिए, एक फोन पर एक दुसरे के लिए तय समय में ही हाजिर मिलते लोग है बनारस।
यहां कोई अजनबी नहीं है, एक पल मिलने के साथ दुसरे क्षण ऐसा व्यवहार मिलता है जैसे
कितने वर्षो से साथ है। यही दूसरे पर मरना और प्यार लुटाना है बनारस। बनारस हिन्दू
विश्वविद्यालय, महात्मा गांधी काशी विश्वविद्यालय, सम्पूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय,
केन्द्रीय तिब्बती विश्वविद्यालय जैसे विश्वविद्यालय इसे ज्ञान की नगरी बनाते है। शायद
तभी कहा जाता है कि बनारस में सिर्फ ज्ञान की वर्षा ही होती है। इसका उदाहरण वहा
जाकर देख भी लिया, थोडी मिठी चाय बनाने के आग्रह पर उस चाय वाले चचा ने जो सुनाया,
सुनाया क्या उन्होने तो समझाया, यही समझाना और अपनापन है बनारस। भगवान बुद्ध की
उपदेश स्थली, अशोक स्तंभ, चौखंडी स्तूप और जैन मंदिर मोक्ष की राह दिखाता सारनाथ
है बनारस। काशी नरेश की आन बान और शान रामनगर का किला और संग्राहलय जिसे देखने के
बाद आखें खुली की खुली रहना है बनारस। कचौडी सब्जी, लौंगलत्ता, समोसा, चाय, लस्सी,
ठंडई और पान का स्वाद है बनारस। मस्ती मे रहने वाला, अपनी धुन मे रहने वाला, अपनी गति से चलने वाला और दिलो-दिमाग
पर राज करने वाला शहर है बनारस।
एक ही झटके में पूरा बनारस घर बैठे ही दिखा दिया।। बहुत खूब।
ReplyDeleteएक ही झटके में पूरा बनारस घर बैठे ही दिखा दिया।। बहुत खूब।
ReplyDeleteDhanywad
Deleteबहुत बढ़िया आलेख। भाषा में गजब का प्रवाह। मुबारक हो।
ReplyDeleteधन्यवाद सर
DeleteThis account reminds me of Vrindavan.Some of the details you mention are just as true for it too! A good attempt to give a virtual tour of perhaps, the most holy city in India!
ReplyDeleteThis account reminds me of Vrindavan.Some of the details you mention are just as true for it too! A good attempt to give a virtual tour of perhaps, the most holy city in India!
ReplyDeleteWah bhai ... dil khush kr diya sabash
ReplyDeleteधन्यवाद भईया,आप सब का प्यार ही है यह।
Delete